Tarachakra

27 नक्षत्र · 10/27

मघा नक्षत्र

27 जन्म नक्षत्रों में 10वां, सिंह राशि में। स्वामी ग्रह केतु, अधिदेवता पितर, पूर्वज, प्रतीक राजसिंहासन।

राशि
सिंह
स्वामी ग्रह
केतु7 वर्ष की दशा
देवता
पितर, पूर्वज
गण
राक्षस
योनि
चूहा (मूषक)
नाड़ी
अंत्य (कफ)
रज्जु
पाद
प्रतीक
राजसिंहासन

मघा का स्वभाव

मघा सिंहासन और पूर्वजों का नक्षत्र है। परंपरा के अनुसार इसके जातकों में गरिमा होती है और वंश, मान-सम्मान और परंपरा का गहरा भाव होता है, और वे नेतृत्व और सार्वजनिक भूमिकाओं की ओर खिंचते हैं। जो उनका सम्मान करते हैं, उनके प्रति वे उदार रहते हैं। उन्हें अहंकार से सावधान रहना है: सिंहासन विनम्रता के साथ ही सबसे अच्छा संभलता है।

ये इस नक्षत्र से जुड़ी पारंपरिक विशेषताएं हैं। आपमें ये कैसे दिखेंगी, यह आपकी पूरी कुंडली, ख़ासकर लग्न और ग्रहों पर निर्भर करता है।

चार चरण

हर नक्षत्र चार चरणों (भागों) में बंटा होता है। चरण से आपकी नवांश राशि तय होती है और परंपरा के अनुसार आपके नाम का पहला अक्षर भी।

चरणराशिनवांशनामाक्षर
1सिंहमेषमा
2सिंहवृषभमी
3सिंहमिथुनमू
4सिंहकर्कमे

विवाह मिलान में मघा

गुण मिलान में मघा से राक्षस गण, चूहा (मूषक) योनि और अंत्य (कफ) नाड़ी आती है। एक ही नाड़ी (कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती) वाले वर-वधू को नाड़ी में 0 अंक मिलते हैं, जिसे नाड़ी दोष कहते हैं, जब तक उसका परिहार न हो।

दक्षिण भारतीय पोरुथम में मघा पाद रज्जु में है, अश्विनी, आश्लेषा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती के साथ; एक ही रज्जु के भीतर के मिलान बहुत सावधानी से जांचे जाते हैं।

ज्येष्ठा6/1032/36
शतभिषा7/1025.5/36
पूर्वा फाल्गुनी5.5/1030/36
आर्द्रा6.5/1022.5/36
भरणी7/1020/36
पुष्य7/1019.5/36
मिलान जांचें

सवाल-जवाब

मघा नक्षत्र किस राशि में है?

मघा सिंह राशि में आता है।

मघा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

मघा का स्वामी केतु है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों का जीवन केतु की महादशा से शुरू होता है, जो 7 वर्ष की अवधि है। इसके अधिदेवता पितर, पूर्वज हैं।

मघा के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

मघा राक्षस गण, चूहा (मूषक) योनि और अंत्य (कफ) नाड़ी का नक्षत्र है। विवाह मिलान में इनकी तुलना की जाती है।

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