Tarachakra

27 नक्षत्र · 19/27

मूल नक्षत्र

27 जन्म नक्षत्रों में 19वां, धनु राशि में। स्वामी ग्रह केतु, अधिदेवता निऋति, विलय की देवी, प्रतीक जड़ों का गुच्छा।

राशि
धनु
स्वामी ग्रह
केतु7 वर्ष की दशा
देवता
निऋति, विलय की देवी
गण
राक्षस
योनि
कुत्ता (श्वान)
नाड़ी
आदि (वात)
रज्जु
पाद
प्रतीक
जड़ों का गुच्छा

मूल का स्वभाव

मूल जड़ का नक्षत्र है। इसके जातक चीज़ों की तह तक जाना चाहते हैं, चाहे दर्शन हो, विज्ञान हो, चिकित्सा हो या उनका अपना जीवन, और असहज सच्चाइयों से नहीं डरते। वे अक्सर गहरे बदलावों से गुज़रते हैं जो उन्हें और समझदार बना देते हैं। परंपरा इसके उखड़ने को सच्चे विकास की शुरुआत मानती है।

ये इस नक्षत्र से जुड़ी पारंपरिक विशेषताएं हैं। आपमें ये कैसे दिखेंगी, यह आपकी पूरी कुंडली, ख़ासकर लग्न और ग्रहों पर निर्भर करता है।

चार चरण

हर नक्षत्र चार चरणों (भागों) में बंटा होता है। चरण से आपकी नवांश राशि तय होती है और परंपरा के अनुसार आपके नाम का पहला अक्षर भी।

चरणराशिनवांशनामाक्षर
1धनुमेषये
2धनुवृषभयो
3धनुमिथुनभा
4धनुकर्कभी

विवाह मिलान में मूल

गुण मिलान में मूल से राक्षस गण, कुत्ता (श्वान) योनि और आदि (वात) नाड़ी आती है। एक ही नाड़ी (अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद) वाले वर-वधू को नाड़ी में 0 अंक मिलते हैं, जिसे नाड़ी दोष कहते हैं, जब तक उसका परिहार न हो।

दक्षिण भारतीय पोरुथम में मूल पाद रज्जु में है, अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, रेवती के साथ; एक ही रज्जु के भीतर के मिलान बहुत सावधानी से जांचे जाते हैं।

विशाखा7–8/1024.5–27/36
आश्लेषा7/1023.5/36
चित्रा6/1027/36
रेवती6/1026.5/36
पूर्वाषाढ़ा5.5/1027/36
उत्तरा भाद्रपद6/1025/36
मिलान जांचें

सवाल-जवाब

मूल नक्षत्र किस राशि में है?

मूल धनु राशि में आता है।

मूल नक्षत्र का स्वामी कौन है?

मूल का स्वामी केतु है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों का जीवन केतु की महादशा से शुरू होता है, जो 7 वर्ष की अवधि है। इसके अधिदेवता निऋति, विलय की देवी हैं।

मूल के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

मूल राक्षस गण, कुत्ता (श्वान) योनि और आदि (वात) नाड़ी का नक्षत्र है। विवाह मिलान में इनकी तुलना की जाती है।

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