पुनर्वसु का स्वभाव
पुनर्वसु लौटने और नवीनीकरण का नक्षत्र है, वह रोशनी जो तूफ़ान के बाद लौट आती है। परंपरा के अनुसार इसके जातक उदार, आशावान और सादी चीज़ों में संतुष्ट रहने वाले होते हैं, और जब भी जीवन उन्हें गिराता है, वे फिर से शुरुआत कर लेते हैं। वे घर और परिवार को बहुत महत्व देते हैं। उनकी देन है फिर से उठ खड़े होने की क्षमता।
ये इस नक्षत्र से जुड़ी पारंपरिक विशेषताएं हैं। आपमें ये कैसे दिखेंगी, यह आपकी पूरी कुंडली, ख़ासकर लग्न और ग्रहों पर निर्भर करता है।
चार चरण
हर नक्षत्र चार चरणों (भागों) में बंटा होता है। चरण से आपकी नवांश राशि तय होती है और परंपरा के अनुसार आपके नाम का पहला अक्षर भी।
| चरण | राशि | नवांश | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | मिथुन | मेष | के |
| 2 | मिथुन | वृषभ | को |
| 3 | मिथुन | मिथुन | हा |
| 4 | कर्क | कर्क | ही |
विवाह मिलान में पुनर्वसु
गुण मिलान में पुनर्वसु से देव गण, बिल्ली (मार्जार) योनि और आदि (वात) नाड़ी आती है। एक ही नाड़ी (अश्विनी, आर्द्रा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद) वाले वर-वधू को नाड़ी में 0 अंक मिलते हैं, जिसे नाड़ी दोष कहते हैं, जब तक उसका परिहार न हो।
दक्षिण भारतीय पोरुथम में पुनर्वसु नाभि रज्जु में है, कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद के साथ; एक ही रज्जु के भीतर के मिलान बहुत सावधानी से जांचे जाते हैं।
| मृगशिरा | 7.5–8/10 | 18–31.5/36 |
| उत्तरा भाद्रपद | 7/10 | 26–28/36 |
| श्रवण | 7.5–8/10 | 23–27/36 |
| रेवती | 6.5/10 | 25.5–27.5/36 |
| भरणी | 6/10 | 27–29.5/36 |
| रोहिणी | 7/10 | 22.5–24/36 |
सवाल-जवाब
पुनर्वसु नक्षत्र किस राशि में है?
पुनर्वसु मिथुन, कर्क राशि में आता है।
पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पुनर्वसु का स्वामी गुरु है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों का जीवन गुरु की महादशा से शुरू होता है, जो 16 वर्ष की अवधि है। इसके अधिदेवता अदिति, देवताओं की माता हैं।
पुनर्वसु के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?
पुनर्वसु देव गण, बिल्ली (मार्जार) योनि और आदि (वात) नाड़ी का नक्षत्र है। विवाह मिलान में इनकी तुलना की जाती है।