श्रवण का स्वभाव
श्रवण सुनने और सीखने का नक्षत्र है। परंपरा के अनुसार इसके जातक बुद्धिमान, जानकार और अच्छे श्रोता होते हैं, जो शिक्षण, परामर्श और मौखिक रूप से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे ज्ञान की ओर खिंचते हैं। उनके संपर्क अच्छे होते हैं और उनका सम्मान होता है। उन्हें ध्यान रखना है कि अपने लिए भी आवाज़ उठाएं।
ये इस नक्षत्र से जुड़ी पारंपरिक विशेषताएं हैं। आपमें ये कैसे दिखेंगी, यह आपकी पूरी कुंडली, ख़ासकर लग्न और ग्रहों पर निर्भर करता है।
चार चरण
हर नक्षत्र चार चरणों (भागों) में बंटा होता है। चरण से आपकी नवांश राशि तय होती है और परंपरा के अनुसार आपके नाम का पहला अक्षर भी।
| चरण | राशि | नवांश | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | मकर | मेष | जू |
| 2 | मकर | वृषभ | जे |
| 3 | मकर | मिथुन | जो |
| 4 | मकर | कर्क | घा |
विवाह मिलान में श्रवण
गुण मिलान में श्रवण से देव गण, बंदर (वानर) योनि और अंत्य (कफ) नाड़ी आती है। एक ही नाड़ी (कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, रेवती) वाले वर-वधू को नाड़ी में 0 अंक मिलते हैं, जिसे नाड़ी दोष कहते हैं, जब तक उसका परिहार न हो।
दक्षिण भारतीय पोरुथम में श्रवण कंठ रज्जु में है, रोहिणी, आर्द्रा, हस्त, स्वाती, शतभिषा के साथ; एक ही रज्जु के भीतर के मिलान बहुत सावधानी से जांचे जाते हैं।
| चित्रा | 7.5/10 | 19.5–27/36 |
| पूर्वाषाढ़ा | 7/10 | 23.5–24.5/36 |
| अश्विनी | 6/10 | 27–28/36 |
| उत्तरा फाल्गुनी | 6.5–7.5/10 | 19.5–24/36 |
| पुनर्वसु | 7/10 | 22–28/36 |
| अनुराधा | 6/10 | 27/36 |
सवाल-जवाब
श्रवण नक्षत्र किस राशि में है?
श्रवण मकर राशि में आता है।
श्रवण नक्षत्र का स्वामी कौन है?
श्रवण का स्वामी चंद्र है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों का जीवन चंद्र की महादशा से शुरू होता है, जो 10 वर्ष की अवधि है। इसके अधिदेवता विष्णु, पालनकर्ता हैं।
श्रवण के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?
श्रवण देव गण, बंदर (वानर) योनि और अंत्य (कफ) नाड़ी का नक्षत्र है। विवाह मिलान में इनकी तुलना की जाती है।