Tarachakra

27 नक्षत्र · 23/27

धनिष्ठा नक्षत्र

27 जन्म नक्षत्रों में 23वां, मकर, कुंभ राशि में। स्वामी ग्रह मंगल, अधिदेवता आठ वसु, समृद्धि के देवता, प्रतीक ढोल।

राशि
मकर, कुंभ
स्वामी ग्रह
मंगल7 वर्ष की दशा
देवता
आठ वसु, समृद्धि के देवता
गण
राक्षस
योनि
शेर (सिंह)
नाड़ी
मध्य (पित्त)
रज्जु
शिरो (सिर)
प्रतीक
ढोल

धनिष्ठा का स्वभाव

धनिष्ठा लय और धन का नक्षत्र है। इसके जातक ऊर्जावान, उदार और अक्सर संगीतप्रेमी होते हैं, जिनमें समृद्धि पाने और समूहों को एकजुट करने का गुण होता है। उन्हें पहचान मिलना अच्छा लगता है। परंपरा उनसे कहती है कि केवल अपने ढोल की नहीं, दूसरों की ताल से भी ताल मिलाएं।

ये इस नक्षत्र से जुड़ी पारंपरिक विशेषताएं हैं। आपमें ये कैसे दिखेंगी, यह आपकी पूरी कुंडली, ख़ासकर लग्न और ग्रहों पर निर्भर करता है।

चार चरण

हर नक्षत्र चार चरणों (भागों) में बंटा होता है। चरण से आपकी नवांश राशि तय होती है और परंपरा के अनुसार आपके नाम का पहला अक्षर भी।

चरणराशिनवांशनामाक्षर
1मकरसिंहगा
2मकरकन्यागी
3कुंभतुलागू
4कुंभवृश्चिकगे

विवाह मिलान में धनिष्ठा

गुण मिलान में धनिष्ठा से राक्षस गण, शेर (सिंह) योनि और मध्य (पित्त) नाड़ी आती है। एक ही नाड़ी (भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद) वाले वर-वधू को नाड़ी में 0 अंक मिलते हैं, जिसे नाड़ी दोष कहते हैं, जब तक उसका परिहार न हो।

दक्षिण भारतीय पोरुथम में धनिष्ठा शिरो (सिर) रज्जु में है, मृगशिरा, चित्रा के साथ; एक ही रज्जु के भीतर के मिलान बहुत सावधानी से जांचे जाते हैं।

मूल7.5/1022–30.5/36
विशाखा6–7/1025.5–30/36
शतभिषा6/1023.5–33/36
कृत्तिका6/1023.5–30.5/36
मघा7/1019.5–25.5/36
ज्येष्ठा6/1026/36
मिलान जांचें

सवाल-जवाब

धनिष्ठा नक्षत्र किस राशि में है?

धनिष्ठा मकर, कुंभ राशि में आता है।

धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

धनिष्ठा का स्वामी मंगल है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों का जीवन मंगल की महादशा से शुरू होता है, जो 7 वर्ष की अवधि है। इसके अधिदेवता आठ वसु, समृद्धि के देवता हैं।

धनिष्ठा के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

धनिष्ठा राक्षस गण, शेर (सिंह) योनि और मध्य (पित्त) नाड़ी का नक्षत्र है। विवाह मिलान में इनकी तुलना की जाती है।

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