Tarachakra

27 नक्षत्र · 15/27

स्वाती नक्षत्र

27 जन्म नक्षत्रों में 15वां, तुला राशि में। स्वामी ग्रह राहु, अधिदेवता वायु, पवन, प्रतीक हवा में झूलता नया अंकुर।

राशि
तुला
स्वामी ग्रह
राहु18 वर्ष की दशा
देवता
वायु, पवन
गण
देव
योनि
भैंसा (महिष)
नाड़ी
अंत्य (कफ)
रज्जु
कंठ
प्रतीक
हवा में झूलता नया अंकुर

स्वाती का स्वभाव

स्वाती स्वतंत्र पवन का नक्षत्र है। परंपरा के अनुसार इसके जातक लचीले, कूटनीतिक और आत्मनिर्भर होते हैं, जो झुकते हैं पर टूटते नहीं और अपना रास्ता खुद बनाते हैं, अक्सर व्यापार या यात्रा में। वे आज़ादी को बहुत महत्व देते हैं। परंपरा उनसे कहती है कि जहां ज़रूरी हो, वहां जड़ें जमाएं।

ये इस नक्षत्र से जुड़ी पारंपरिक विशेषताएं हैं। आपमें ये कैसे दिखेंगी, यह आपकी पूरी कुंडली, ख़ासकर लग्न और ग्रहों पर निर्भर करता है।

चार चरण

हर नक्षत्र चार चरणों (भागों) में बंटा होता है। चरण से आपकी नवांश राशि तय होती है और परंपरा के अनुसार आपके नाम का पहला अक्षर भी।

चरणराशिनवांशनामाक्षर
1तुलाधनुरू
2तुलामकररे
3तुलाकुंभरो
4तुलामीनता

विवाह मिलान में स्वाती

गुण मिलान में स्वाती से देव गण, भैंसा (महिष) योनि और अंत्य (कफ) नाड़ी आती है। एक ही नाड़ी (कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती) वाले वर-वधू को नाड़ी में 0 अंक मिलते हैं, जिसे नाड़ी दोष कहते हैं, जब तक उसका परिहार न हो।

दक्षिण भारतीय पोरुथम में स्वाती कंठ रज्जु में है, रोहिणी, आर्द्रा, हस्त, श्रवण, शतभिषा के साथ; एक ही रज्जु के भीतर के मिलान बहुत सावधानी से जांचे जाते हैं।

हस्त8/1027.5/36
पुनर्वसु7–8/1028–29/36
भरणी7/1029.5/36
मृगशिरा7.5–8/1026–27/36
पुष्य6/1027.5/36
पूर्वा फाल्गुनी6.5/1025.5/36
मिलान जांचें

सवाल-जवाब

स्वाती नक्षत्र किस राशि में है?

स्वाती तुला राशि में आता है।

स्वाती नक्षत्र का स्वामी कौन है?

स्वाती का स्वामी राहु है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों का जीवन राहु की महादशा से शुरू होता है, जो 18 वर्ष की अवधि है। इसके अधिदेवता वायु, पवन हैं।

स्वाती के गण, योनि और नाड़ी क्या हैं?

स्वाती देव गण, भैंसा (महिष) योनि और अंत्य (कफ) नाड़ी का नक्षत्र है। विवाह मिलान में इनकी तुलना की जाती है।

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